एक कामुक पड़ोसन

हमलोग के घर के पास एक परिवार रह्ता था, जिसके घर से हमलोगो का आना जाना था ! उस परिवार की माया चाचि मेरी मम्मी की सहेली थी और अक्सर ही दोनो एक दुसरे के घर आया जाया करती थी ! माया चाची की उम्र 40-42 साल की थी और उनका बदन थोड़ा मांसल, सांवला रंग़, बड़ी-2 चुची और गोल गुम्बदाकार चुत्तर ! एक दोपहर मे उनके घर कुच्ह काम से गया तो दरवाजा खुला था और मै अंदर घुसकर आवाज देने लगा….. “चाची….. चाची…….. किधर है आप

(माया) बैठो राहुल मै अभी आई. ” और मै एक कुर्सी पर बैठ गया, पल भर बाद माया चाची हाल से लगे बाथरूम से निकली, वो सिर्फ़ साया पहनी थी, अपने पेटीकोट को छाती के उपर से बांधकर अपने चुची और बुर के हिस्से से लेकर जङ्हा तक को धक्के हुए थी! उनके नग्न पैर से लेकर बाहो तक को देख मेरा दिमाग खराब होने लगा!

माया चाची मेरे सामने आकर खड़ी हो गयी और अपने कमर पर हाथ रखकर बोली….. “बोलो राहुल क्या काम है

(राहुल) मम्मी को केबुल वाले का नम्बर चाहिए

(माया) ठीक है अभी देती हू. ” और वो मेरे सामने से अपने कुल्हे को मट्काते हुए चली गयी ! पल भर बाद अपना मोबाइल लेकर आई और मुझे देकर बोली….. “इससे निकाल लो. ” वो अब भी सिर्फ़ पेटिकोट मे थी, मेरे सामने से गांड़ हिलाते हुए चली गयी और मै नम्बर निकालकर अपने मोबाइल मे शेभ कर लिया ! हाल मे बैठे-2 उनके कमरे की ओर देख रहा था, पर्दा की वजह से कमरा के अंदर देख नही पा रहा था, हिम्मत करता हुआ उठा और दरवाजे के पास जाकर खड़ा हो गया और पर्दे के पिच्हे से अंदर देखने लगा, मेरा तो होश हि उड़ गया, माया चाची दर्पन के सामने नण्गे खड़ी थी और मै उनके बुर का हिस्सा दर्पन मे देख पा रहा था, उनके अग्ले हिस्से के प्रतिबिम्ब को दर्पन मे देखता हुआ लंड़ खड़ा हो गया ! माया अपने बुर को उङ्ली की मदद से खोलकर देख रही थी और उनके बड़े-2 स्तन और उसका निप्ल देख मेरा मन गंदा होने लगा जबकी उनका भारी -भरकम चुत्तर से नग्न पिठ तक मेरे आंखो के सामने नण्गे थे ! अब वो अपने साया को हाथ मे लेकर पहनने लगी, वो साया को फ़िर से अपने छाती से बांध ली और जैसे ही पिच्हे की ओर मुड़ी, मुझे देखकर वो अचम्भित हो गयी, मेरी ओर आते हुए बोली…… “अरे राहुल तुम यहा खड़े हो, तुम मुझे नण्गा देख लिये

(राहुल) सारी चाची दरअसल मुझे लगा की आपसे मिलकर जाना चाहिये

(माया) ओह मत्लब की तुम मुझे नण्गा देखने के लिये इधर खड़े थे. ”

मेरा ड़र से हाल खराब था और मै अब जाने के लिये जैसे ही पल्टा, चाची मुझे पिच्हे से दबोच ली, वो मेरे कमर को थामे अपने बदन को मेरे पिठ पर रगड़्ने लगी, उसके मांसल चुचक मेरे पिठ से रगड़ खा रहे थे और वो मेरे गर्दन को चुमते हुए अपना हाथ मेरे पेंट के उपर लंड़ के उभार पर लगा दी! अब मै समझ गया की माया को क्या चाहिए, मै सिधा होकर चाचि को अपने सिने से लगा लिया और उनके नितम्ब पर हाथ फ़ेरता हुआ गाल और ओंठ चुमने लगा ! अब वो मेरी आगोश मे थी और मेरे गाल चुमते हुए वो अपना जिभ मेरे मुह्न मे भर दी, मै चाची की जिभ चुसता हुआ उसके गांड़ को सहलाने लगा ! माया मुझे लेकर अपने बिस्तर पर चली गयी, अब वो बेड़ पर लेटी हुई थी तो मै उसको घुरता हुआ अपना कपड़ा खोलने लगा, वो मुझे देख शर्मा रही थी और मै अपने बदन पर एक चड़्ही हि रहने दिया ! अब माया के साया के नाड़ा को खोल दिया और साया को उसके छाती से निचे करने लगा, चाची का बड़ा-2 स्तन और भुरे रंग़ के निप्पल नग्न थे तो मै माया के बदन को पुरी तरह से नण्गा करके गोलाई को मसलने लगा, दोनो चुचि को ऐसे मसल रहा था मानो आंटा गुंथ रहा हु ! चाचि सिसकने लगी और मै उनके सिने पर अपना चेहरा झुकाकर चुचि चुसने लगा, उसकी बड़ी-2 चुचि पुरी तरह से मुह्न मे नही घुस रही थी, खैर उसके दोनो स्तन को पल भर तक चुसा और फ़िर अपने जिभ से उसके भुरे-2 किस्मिस की तरह के निप्पल को चाट्ने लगा और वो बोलने लगी….. “आह्हह ऊह्ह बुर मे कितनी खुजली हो रही है आह्ह चोदो ना मुझे

(राहुल) चुपकर साली रंड़ी खुद साया पहनकर अपना अंग प्रदर्शित करती है और बोलती है कि मुझे नण्गा देख रहा था

(माया) तो क्या राहुल खुद ताण्ग फ़ैलाए चुदवा लेती. ”

अब चाची के कमर को चुमता हुआ उसके मोटे-2 जाङ्ह को सहलाने लगा, उसके चुत्तर के निचे एक तकिया ड़ालकर दोनो पैर को दो दिशा मे किया और माया के बुर को देखने लगा ! मम्मी की उम्र की औरत थी, बुर ब्रेड़ पकोड़ा की तरह फ़ुली हुई थी और उसपर छोटे-2 बार थे, बुर के दोनो रान अलग थे और मै झुककर बुर को चुमने लगा, वो रांड़ अपनी उण्गली से रान फ़लकाने लगी, अब बुर का आंतरिक हिस्सा दिखने लगा और मै अपना लम्बा सा जिभ उसकी बुर मे घुसाकर बुर चोदने लगा ! माया की बुर मे 12-14 इंच लम्बा और 4-5 इंच मोटा लंड़ आसानी से घुस सकता था, अभी तो कुते की तरह उसकी बुर को अपने जिभ से चाट रहा था, उसके बुर के अंदर मेरा पुरा जिभ घुस रहा था और मेरा लंड़ पुरी तरह से चोदने को आतुर थी ! तभी माया मेरे बाल को कसकर पकड़े मेरे सर को अपने बुर की ओर धंसाने लगी और अब तो सांस लेना भी मुस्किल हो रहा था, लेकिन मै बुर से जिभ निकालकर उसके दोनो रान को अपने मुह्न मे ले लिया और चुसने लगा ज्बकी माया चिंख रही थी…… “अरे हरामी कुत्ते मेरी बुर मे लंड़ ड़ालकर चोद ना. ” मै बुर को चुसकर बाथरूम गया और मुतने लगा ! वापस आया तो माया बेड़ पर लेटी हुई थी और उनके जङ्हा के बिच मे लंड़ थामे मै बैठा था और वो बुर फ़लकाये लेटी हुई थी, अब लंड़ को बुर मे घुसेड़ दिया और चाची की बुर को चोदता हुआ मस्त हो रहा था ! उसके गदराए बदन पर सवार होकर तेज चुदाई करने लगा और माया अपने गददेदार गांड़ को उपर निचे करने लगी, मै उनको चोद्ता हुआ उनके गाल को चुमने लगा जबकि उनकी बड़ी-2 चुचि मेरे सिने से दब रहे थे, माया का बदन सण्गमरमर की तरह चिकनी थी और उस पर लेटकर चोदने का मजा मै ले रहा था ! पल भर बाद चाची और भतिजा दोनो ही चोदकर -चुदकर हांफ़ने लगे और माया चिंख पड़ी….. “आह्हह ऊह्ह और तेज चोदो मेरे राजा आह्ज बुर से कितने दिनो बाद पानी निकलने वाला है. ” और माया की बुर रस से भर गयी.

मै माया चाचि के बुर पर मुह्न लगा दिया और बुर मे जिभ घुसाकर रस चाट्ने लगा, वो मेरे से काफ़ी खुश थी, अब चाची बाथरूम जाकर छर-2 मुतने लगी और अब वो बेड़ पर कुत्तिया कि तरह हो गयी ! मै उसके चुत्तर के सामने बैठ्कर अपना लंड़ बुर मे ड़ाला और चुदाई करने लगा जबकी माया अपने गांड़ हिलाहिलाकर चुदवाने लगी, थोड़ी देर बाद मेरे लंड़ से विर्य स्खलित होने लगा और माया चुदक्कर चुद कर मस्त हो गयी……..

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Linga11

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