जिंदगी का सफर दीदी के साथ भाग 11

उस रात दीदी की जोरदार चुदाई कर के हम मस्ती में चूर हो कर सो गए और सुबह मेरी आँख 9 बजे के आसपास खुली दीदी अभी भी नंगी बेसुध पड़ी सो रही थी मैं उठ कर फ्रेश हुआ और दीदी को भी जगाया वो भी फ्रेश हो कर आई और फिर नाश्ता कर के हम घूमने निकल गए उस दिन हमने शॉपिंग भी की दीदी के लिए कुछ बेहद सेक्सी और महंगी lingerie खरीदी और फिर मुझे एक सेक्स टॉय शॉप के बारे में पता चला …. दीदी को होटल छोड़ कर वहां गया और मैंने एक पट्टा चेन और कुछ butt plug dildos mouth balls और भी कुछ टॉयज खरीदे और सब पैक करवा कर होटल आ गया ….. शाम के 4 बज रहे थे हम एक बार फिर बीच पर गए और उस दिन तो उजाले में ही हमने बीच पर एक धमाकेदार चुदाई की दीदी बेहद खुश थीं और हर तरह से मुझे खुश रखने की कोशिश कर रही थीं ….. ऐसे ही गोआ में मौज मस्ती भरे 5 दिन बीत गए हमारा हनीमून ओवर हुआ और हम वापस घर के लिए उड़ चले ….. सेक्स टॉयज मैंने साथ ना ले जा कर कूरियर कर दिए थे घर के एड्रेस पर ….. दोपहर 2 बजे हमने फ्लाइट ली और शाम 7 बजे हम अपने घर के दरवाजे पर थे …. मेरे दोनों हाथों में बैग्स थे हमेशा की तरह दीदी ने जेब से चाभी निकाल कर दरवाजा खोला और हम अंदर आ गए ….. थके हुए थे और खाना तो होटल से ही खा कर आये थे तो आते ही बस सो गए हम और अगले दिन फुल रेस्ट कर के नेक्स्ट डे मैं आफिस जाने लगा ….. हफ्ते भर का पेंडिंग निपटाते 3-4 दिन बीत गए पता ही नही चला हां इसी बीच वो टॉयज वाला पैक आ चुका था दीदी ने पूछा भी इसमे क्या है मैने कहा बाद में बताऊंगा ….. इस बीच हमने खास चुदाई भी नही की सिर्फ एक बार नार्मल चुदाई ….. फिर आया सैटरडे और उस दिन काम थोड़ा सा कम भी था …. शाम के तीन बजे मैं थोड़ा सा फ्री हो कर अपने केबिन में अकेला बैठा था ….. बस अचानक मुझे अपनी रुचि दीदी की याद आयी और मैंने फ़ोन पर cam on किया तो देखा दीदी अपने रूम में लेटी हुई tv देख रही थी हां कभी कभी वो अपनी पजामी के ऊपर से अपनी चूत पर हाथ फिरा रही थी …. मैंने तुरंत उन्हें कॉल की …..
दीदी- हेलो संजू
मैं – हेलो my sweet wife क्या हो रहा ….
दीदी- कुछ नही बस tv देख रही थी
मैं- सिर्फ tv देख रही ??
दीदी- हाँ
मैं- और चूत कौन सहला रहा ….
दीदी- हेहेहे वो तो नार्मल बात है
मैं- अच्छा साली नार्मल बात है मतलब तू चुदासी नही है (अब tv की आवाज़ बंद हो गयी शायद दीदी में tv ऑफ कर दिया था)
दीदी- चुदासी तो हमेशा रहती हूं मेरे राजा पर मेरे साजन को इतना काम रहता है कि उसे अपनी बीवी को चोदने की फुरसत ही नही मिलती …..
मैं- आज सैटरडे है और मैं आज शाम 6 बजे परसों सुबह 7 बजे तक फ्री ही फ्री हूँ अपनी रण्डी को रगड़ने लिए ….. बस तू अपनी चूत और गांड़ रेडी रखना साली कुतिया ….
दीदी- उफ़्फ़फ़ तेरी तो बातें सुन कर ही मेरी चूत गीली हो गयी राजा …. जल्दी से घर आ जा मैं चूत फैलाये मिलूंगी अपने राजा को बस आ कर अपना मोटा लंड पेल देना अपनी चुदासी कुतिया की बुर में और इतना चोदना की मैं पागल हो जाऊं ….
मैं- हां मेरी जान इसीलिए कॉल की है अब मेरी बात सुन वो जो कूरियर आया था उसे ओपन कर ले कर …..
दीदी- ok wait (और एक मिनट बाद कुछ आवाज़ें आयी पैक खोलने की) हां खोल लिया …. इसमे तो बड़े अजीब से सामान हैं ….
मैं- जो भी तुम्हे इनका इस्तेमाल तो मालूम ही है ना इतने वीडियोस दिखा चुका हूं साली तुझे ….
दीदी- हां देखे तो हैं पर कभी इस्तेमाल नही किये ना ….
मैं – तो आज कर ले और सुन जब मैं घर पहुँचूँ तो एकदम रेडी मिलना क्या करना है कैसे करना है तू जाने पर ये समझ ले अगर कोई कमी हुई तो तेरी गांड़ लाल कर दूंगा …. उस समान में एक लेदर का पट्टा और एक स्टिक भी है वो तेरी गांड़ लाल करने के लिए ही है ….
दीदी- ओ मेरे राजा मैं पूरी कोशिश करूंगी फिर भी कोई गलती हो कर ही देना मेरी गांड़ लाल …. और हां आज कुछ पीने को लेते आना ….
मैं – ok रानी अब रखता हूं love you साली रण्डी
दीदी- love you to my sweet hubby

इस बातचीत में ही मेरा लंड सख्त हो कर पत्थर जैसा हो चुका था और मैं बैठा शाम और रात को मिलने वालेमज़े की कल्पना करते हुए खुश हो रहा था तभी संजीव कुछ फ़ाइल ले कर आया मैंने उन्हें देख कर सिग्नेचर किये और संजीव से कहा यार कुछ इंतजाम करो पीने का उसे पैसे ऑयर अपनी कार की चाभी दे दी हांलाकि वो पैसों को मना कर रहा था पर मैंने ये कहते हुए की रोज रोज ठीक नही है जब तेरे घर आऊं तू कर देना इंतजाम ….. वो चला गया दारू लेने और उधर मैंने फिर से फोन पर cam न किया दीदी अब रूम में नहीं थी दूसरा cam देखा तो वो बाथरूम में थी अपने बाल शैम्पू कर के बाथ ले रही वो भी एकदम नंगी शायद उसे अंदाजा रहा होगा कि मैं उसे देख रहा हूँ फोन पर …. दीदी के नहाने में कोई आधा घंटा लगाया और फिर वो टॉवल लपेट कर रूम में आ गयी …. बदन पोंछ कर बॉडी लोशन लगा कर पूरे इत्मीनान से फुल मेकअप किया नंगे ही आंखों में काजल eye liner सुर्ख लिपस्टिक ना जाने क्या क्या मुझे तो उस सब की ज्यादा knowledge भी नही थी पर मैं दीदी को ऐसे सजते संवरते देख कर सिर्फ ये सोच रहा था इस खूबसूरत औरत का जिस्म घर जा कर मुझे रगड़ना है बेदर्दी से इसी बीच संजीव आया मुझे चाभी दे गया और मैंने उस से एक हाफ साथ भी लाने को कहा था तो दो बोतलें तो वो गाड़ी में ही छोड़ आया था पर एक हाफ लेता आया था …. जैसे ही वो केबिन में आया मैंने कहा दरवाजा अंदर से बंद कर ले उसने बंद किया और मैंने उसे pag बनाने को बोला उसने जल्दी से ड्रा से ग्लास निकाल कर हल्के हल्के दो pag बनाये और हमने एक सांस में उसे खाली किया आफिस का मामला था देर करनी ठीक नही थी और जल्दी से दूसरा pag बना के उसे भी खींच कर ग्लास धो कर वापस रख कर वो चला गया …. मैंने दूसरी दराज से काजू निकाले और मुह का स्वाद ठीक करते हुए फिर से फोन पर देखा तो अब दीदी का मेकअप पूरा हो चुका था और वो वैसे ही नंगी बेड पर वो सारे टॉयज रखे हुए ध्यान से देख रही थी …. फिर दीदी ने एक butt plug उठाया वो हार्ड रबर का बना हुआ छोटे लंड जैसे पर काफी मोटा था दीदी ने उसे गौर से देखा फिर मुह में ले कर चूस कर गीला किया और थोड़ा सा झुक कर गांड़ फैला कर उसे गांड़ के छेद में घुसाने लगी पर वो काफी मोटा था लेकिन दीदी ने किसी तरह उसे गांड़ में ठूंस लिया अब वो मोटा से प्लग दीदी की कसी हुई गांड़ में घुसा हुआ था फिर दीदी उठ खड़ी हुई और लिंगेरी वाला पैक ले आयी उसे खोल कर एक स्काई कलर की ब्रा और ठोंग का सेट निकाला और उसे पहन लिया वो ब्रा ऐसी थी कि बस निप्पल के सामने ढाई इंच कपड़ा और पतली सी डोरी और ठोंग भी ऐसा की सिर्फ चूत की क्रैक और गांड़ के छेद को कवर किया और पतली सी डोरी कमर पर इसके बाद दीदी ने वार्डरोब खोल कर एक रेड कलर की सिल्क की साड़ी निकाली साथ मे रेड पेटीकोट और नेट का मैचिंग ब्लाउज और वो सब पहन कर जब वो रेडी हुई तो मेरे दिल दिमाग और लंड में ऐसी हलचल मची की मुझसे आफिस में रुकना मुश्किल हो गया मैंने एक हल्का सा pag और बना कर मारा पौने पांच हो रहे थे …. मैंने केबिन लॉक किया बाहर आया बैंक का स्ट्रांग रूम लॉक करवाया आओए स्टाफ को जरूरी निर्देश दे कर घर की ओर निकल लिया …… रास्ते मे मैंने होटल से बेहतरीन खाना पैक करवाया और दीदी को वीडियो कॉल की गाड़ी में बैठे हुए ….. दीदी ने कॉल रिसीव की उनके गोरे चिकने चेहरे पर लाली थी शायद चुदाई की खुशी झलक रही थी मैंने कहा रुचि क्या बात है आज को गजब ढा रही बो वो बोली जल्दी आओ ना मैंने कहा बस रास्ते मे हूँ खाना पैक करवा लिया है तुम बस पीने का इंतजाम रखना मैं जल्दी ही आता हूं …. दीदी ने कहा ok … मैंने कहा रुचि … दीदी बोली हं संजू क्या है बोलो ना …. मैंने नशे और उत्तेजना में फुंफकरते हुए कहा आज तेरी चूत का भोसड़ा बनाऊंगा साली मादरचोद ….. ये सुन कर दीदी सेक्सी आवाज़ में बोली जल्दी आना साले मैं भी देखूं कितना दम है तेरे लंड में इस रण्डी की चूत की प्यास बुझाने का और फिर मैंने कॉल काटी और बस कार घर की ओर दौड़ा दी ….. घर पहुंच कर कार पार्क कर के दारू की बोतलें और खाने का पैक ले कर मैं ऊपर आया और मेरे बेल बजाने से पहले ही दीदी ने दरवाजा खोल दिया …. उनके बदन से आती हुई परफ्यूम की खुशबू से मेरा लंड और झटके खाने लगा …. दीदी ने मेरे हाथों से सामान लिया और मैं अंदर आ गया मैंने दरवाजा बंद किया और देखा टेबल पर पानी एक जग आइस बॉक्स सोडे की बोतल और काफी सारा स्नैक्स लगा हुआ था दीदी ने हाई हील सैंडल पहने थे और सारी इतनी कसी हुई पहनी थी कि उसकी उभरी हुई गांड़ मुझे पागल बना रही थी …. दीदी ने खाने का सामान किचन में रखा और एक बोतल ल कर मेज़ पर रख दी …. उनके चेहरे पर एक कातिल मुस्कान थी और मैं खड़ा बस उन्हें ऊपर से नीचे तक देखते हुए अपना लंड मसल रहा था …. दीदी ने मेरे पास आ कर मेरा हाथ पकड़ कर मुझे सोफे पर बिठाया और वही जमीन पर बैठ कर मेरे जूते खोलने लगी मेरे जूते मोज़े उतार कर उन्होंने शेल्फ पर रखे और फिर वापस आ कर मेरी शर्ट के बटन खोलते हुए उसे भी निकाल दिया ….. ऎसी की ठंडक से मेरा पसीना सूखने लगा …. दीदी ने पूछा पहले नहाओगे या पियोगे …. मैंने कहा एक pag पिला दो फिर नहाऊंगा दीदी ने सोफे पर बैठते हुए बोतल खोली और दो गिलास में डाल कर आइस डाली और पानी डालने लगी तो मैंने रोका …. वो सवालिया नजरो से मेरी ओर देखने लगी …. मैंने कहा दीदी अगर इस पानी की जगह कुछ और डालो तो जिस से नशा दुगना हो जाये …. वो कुछ समझ नही पाई बोली ऐसा क्या डालूं सोडा ?? मैंने एक हाथ उसकी साड़ी के ऊपर से चूत पर रखा और कहा अपनी इस टंकी का पानी डाल कर बनाओ न pag एक पल उन्होंने सोचा और फिर मेरी बात समझ में आते ही मसुकुरा कर बोली अच्छा अब समझी और फिर वो जग का पानी किचन में फेंक कर खाली जग ले कर आई और वही मेरे सामने खड़ी हो अपनी साड़ी पेटीकोट उठा कर ठोंग को थोड़ा सा साइड कर के जग को चूत के सामने रख मेरी आँखों मे देखती हुई मूतने लगी …… कोई डेढ़ गिलास ताजा गरम मूट उनकी बुर से निकल कर जग में इकट्ठा हुआ और फिर दीदी ने अपने कपड़े सही कर के सोफे पर बैठते हुए दोनों एक गिलास में अपना मूत डाल कर pag बना दिया …. और गिलास उठा कर मेरे होठो से लगा कर बोली लो राजा पियो अपनी दीदी के मूत से बना हुआ pag और पी कर दीदी की चूत पर टूट पड़ो …. मैंने दो घूंट चुसक कर कहा सिर्फ एक ही बनाया तुम नहीं पियोगी …. तो दीदी हंसते हुए बोली जिसे मैंने तुम्हारे लिए बनाया तुम भी मेरे लिए बना दो ना …. उनकी बात समझते ही मुझे मज़ा आ गया और मैंने खड़े हो कर ज़िप खोली और दीदी वाला गिलास उठा कर लंड निकाल कर उसमे मूत कर गिलास फुल कर दिया और दीदी को पकड़ा दिया …. दीदी ने एक बार मेरी ओर देखा और फिर एक झटके में पूरा गिलास खाली कर दिया उधर मैं भी अपना गिलास उठा कर घूंट भरते हुए पी रहा था और इस pag का स्वाद वाकई अलग था और नशा कई गुना ज्यादा ……
दीदी ने गिलास खाली कर कुछ चिप्स उठाये और मुझे खिलाते हुए खुद भी एक चिप्स अपने होठो में दबा लिया ….. मैंने बोतल उठा कर अपने गिलास में थोड़ी और दारू डाली और एक बार दीदी का पेशाब गिलास में भर कर एक pag बनाया और चुस्की लेते हुए शराब पीने लगा ….. दीदी ने मेरी ओर प्यासी नजरो से देख कर कहा मुझे एक ही pag मिलेगी क्या आज मैंने उनके गिलास में भी दारू डाली और फिर से उसे मूत कर भर दिया और दीदी के होठो से लगा दिया दीदी ने गिलास ले कर एक सिप लिया और बोली अब जल्दी से नहा लो राजा जी तुम्हारी रांड की चूत में बहोत आग लगी है ….. मैं दारू का गिलास लिए हुए बाथरूम के घुस गया और नहा कर टॉवल लपेट कर बाहर आ गया शाम से लगातार पीने की वजह से मैं अच्छे खासे नशे में आ गया था और मेरा लंड तन कर लोहे जैसा सख्त था …. और टॉवल में टेंट बना हुआ था ….. मैं बाहर आ कर सोफे कर बैठ गया हांलाकि नशा काफी था पर नहाने की वजह से अब मैं थोड़ा सा कंट्रोल में था पर शराब के साथ दीदी के बदन का नशा मेरे सर पर चढ़ रहा था दीदी सामने वाले सोफे पर बैठी शराब के घूंट भरते हुए स्नैक्स का मज़ा ले रही थी मझे देखते ही दीदी ने एक झटके में अपना गिलास खाली किया और मेज़ पर पटक कर खड़ी हो गयी और एक चुदासी रण्डी जैसे मुझे देखते हुए मेरे पास आई और मेरी गोद मे खड़े लंड पर अपनी गदराई गांड़ रख कर बैठ गयी पर बैठते ही उसके मुह से एक सिसकी नीकल गयी …. शायद उसकी गांड़ में घुसा हुआ प्लग मेरे लंड के दबाव से और अंदर घुस गया था ….. दीदी थोड़ा सा सरक कर मेरी बायीं जांघ पर बैठ गयी और झुक कर मेरे नंगे सीने पर अपने सुर्ख होंठ रख कर चूमने लगी वो भी अब नशे में और चुदाई की उत्तेजना में जल रही थी और सांसे किसी नागिन की फुंफकार जैसे लग रही थी दीदी ने मेरे सर के पीछे हाथ डाल कर मेरे बालो को मुट्ठी में कसा और मेरे होठो को बुरी तरह चूसने लगी दो मिनट तक जी भर कर मेरे होठो को चूसने के बाद उसने अपनी जीभ मेरे मुह में डाल दी और फिर मेरी जीभ पर अपनी जीभ रगड़ने लगी मेरा भी दिमाग अब आउट होने लगा था …. मैंने एक हाथ दीदी की रेशमी साड़ी पर से उसकी जांघ पर रखा और जोर जोर से दबाने लगा ….. दीदी की सांसे और भारी होने लगी और नेट के सेक्सी ब्लाउज में कसी उसकी भारी चूचियाँ ऊपर नीचे होने लगी ….. तभी दीदी ने अपनी जीभ मेरे मुह से निकाली और मेरे गाल पर जीभ फिराते हुए मेरे कान तक ले गयी और कान को होठो में दबा कर काटने लगी …. मैं मज़े से गनगना गया और मेरे मुह से निकला क्या कर रही है कुतिया …. दीदी बोली अब बस देखता जा अपनी रण्डी बहन का कमाल आज तेरी दीदी तुझे वो मज़े देगी जो किसी टॉप की रण्डी ने अपने ग्राहक को भी नही दिए होंगे …. और मेरी टॉवल खींच कर खोल दी और मेरे खड़े नंगे लंड को भूखी आंखों से देखने लगी …. मैंने कहा दीदी मादरचोद साली उसी दिन जैसे लौड़ा चूस ना आ कर तो दीदी उठ कर अपनी गांड़ मटकाते हुए मेरे पैरों के पास बैठ गई और झुक कर मेरे दोनों पैर के पंजो पर बारी बारी जीभ फिराते हुए कुतिया जैसे मेरे पैर चाटने लगी …… और फिर मेरे पांव की उँगलियों को मुह में हर कर चूसने लगी हर गुजरते पल के साथ मेरा लंड और भी सख्त गर्म होता जा रहा था कुछ देर ऐसे ही मेरे पैरों को चूसने चाटने के बाद दीदी ने ऊपर मेरी टांगों को चूमते चाटते सहलाते हुए और ऊपर जांघो तक मेरे जिस्म को सहलाते हुए अपने होठ मेरी जांघो के जोड़ पर यानी मेरे फूले हुए बॉल्स पर रख दिये औरअपने कोमल हाथ से मेरा सख्त लंड मसलते हुए बड़ा सा मुह खोल कर मेरे वीर्य से भरे हुए टट्टे को मुह में भर कर चूसते हुए लंड पर तेजी से हाथ चलाने लगी …. और फिर मुह से टट्टे निकाल कर संजू कैसा लग रहा है ….. कोई और ख्वाइश हो तो बताना आज तेरी छिनाल दीदी तुझे हर सुख देगी …. मैं तो अपने प्यारे भाई के लंड की प्यासी और दासी हूँ …. मैं जो नशे और सुख में डूब कर आंखे बंद किये मज़े में खोया हुआ था एकदम से आंखे खोल कर दीदी को देखा और बोला तू फिक्र ना कर माँ की लौड़ी अभी अपने मन ली कर ले तू पहले कुतिया उसके बाद मेरी बारी आएगी …. और मैंने अपनी टांगे फैला कर थोड़ा सा ऊपर हवा में उठा दी मेरी गांड़ खुल कर दीदी के सामने थी दीदी ने नशीली आंखों से मेरी और देखा और झुक कर अपनी नाक मेरी गांड़ के छेद अपर टिका दी और गहरी सांस लेते हुए कुतिया जैसे मेरी गांड़ सूंघने लगी …. चार पांच बार सूंघने के बाद दीदी ने अपनी जीभ की टिप स मरी गांड़ के नन्हे से कसे हुए छेद को कुरेदते हुए चाटना शुरू किया और मेरे सख्त लंड को मुट्ठी में भर कर जोर से मसलने लगी दीदी किसी भूखी कुतिया जैसे मेरी गांड़ चाट रही थी कभी कभी वो मेरी गंडक छेद को मुह में भर कर चूसने लगती और कभी अपनी जीभ को गांड़ की दरार में ऊपर से नीचे तक फिरा कर चाटती …. और फिर आखिर में दीदी ने अपनी जीभ गांड़ की दरार से फ़िराते हुए बॉल्स को चाटते हुए लंड की जड़ से जीभ फिराते हुए सुपाड़े तक का सफर तय किया और मेरी आँखों मे देखते हुए लंड की स्किन को सरका कर मोटा सुपाड़ा नंगा कर उसे जीभ से रगड़ते हुए चाटने लगी …. मेरे मुह से एक आहहह निकल गयी और मैंने कहा मुह में ले ले भोसड़ी की दीदी ….. दीदी ने मेरा एक हाथ पकड़ कर अपनी चूची पर रख दिया और मैंने पूरा जोर लगा कर दीदी की चूची मसल दी दीदी के मुह से दर्द भरी किलकारी निकली और वो बोली हां संजू ऐसा ही दबा अपनी रण्डी की चूचियाँ ….. मैंने दीदी के खुले रेशमी बाल मुट्ठी में पकड़ कर उनके होठ अपने सुपाड़े पर रखे और सर को लंड पर दबाते हुए उनके गले तक सुपाड़ा पेल दिया और उसकी चूचियाँ मसलते हुए बोला ले मादरचोद रण्डी खा अपने भाई का लंड साली दो टके की कुतिया दीदी अपना सर हिला हिला कर अपने मुह को मेरे लंड से चोदने लगी …. और मेरे हलक से गुर्राहट निकलने लगी कुछ मिनट तक ऐसे लंड चुसवाने के बाद मेरे बर्दाश्त से बाहर हो गया और मैंने दीदी को बालों से पकड़ कर ही खड़ा किया और खुद भी नंगा खड़ा हो गया और अपनी प्यारी रुचि दीदी को बालों से ही पकड़े हुए ले कर उसके रूम में आ गया जहां बेड पर वो सारे सेक्स टॉयज बिखरे हुए पड़े थे मैंने दीदी को बेड के पास ले जा कर उसकी साड़ी पकड़ कर खिंचते हुए खोल दी और ब्लाउज के हुक खोलते हुए उसे भी उतार कर फेंक दिया दीदी अब सिर्फ लाल पेटीकोट और उस ना के बराबर ब्रा में सामने खड़ी थी मैंने देर न करते हुए उसके पेटीकोट का नाड़ा भी खींच दिया और बेड से handcuff ले कर उसके हाथ पीठ के पीछे बांध दिए और पेटीकोट सरक कर दीदी के पैरों में गिर गया और दीदी एक स्टेप आगे आ कर पेटीकोट से बाहर आ गई अब दीदी के जिस्म पर सिर्फ वो ब्लू लिंगरी और ब्लैक हाई हील सैंडल थे जिसमें वो सच के एक महंगी रण्डी लग रही थी और इस मस्त जवान रांड के जिस्म पर सिर्फ मेरा हक था …. इसके बाद मैंने एक पिंक कलर का माउथ बॉल लिया और दीदी के पास जा कर गुर्राया …. मुह खोल भोसड़ी की …. और दीदी ने नशीली नजरों से मेरी ओर देखते हुए मुह खोल दिया मैंने दीदी के मुह में बॉल घुसा कर उसे बांध दिया अब दीदी चीख नही सकती थी ….. अब मैंने एक केन उठाया ये एक हार्ड रबर की पतली सी स्टिक थी और उसे दीदी के नरम चूतड़ों पर फिराते हुए हल्के से एक बार दीदी की मुलायम चूतड़ों पर मारा दीदी के मुह से एक आह निकली पर वो उनके गले मे ही घुट कर रह गयी …. फिर मैं दीदी को दोबारा बालो से पकड़ कर सामने की दीवार तक ले गया और उसे दीवार से सटा कर दबा दिया दीदी का गाल दीवार से चिपका हुआ था और फिर मैंने पीछे से दीदी की गर्दन को चूमना शुरू किया मैं दीदी की बैक को चूमते हुए हल्के हल्के दांतो से काट भी रहा गर्दन के बाद मैं उनकी पीठ पर ऐसे ही दांतो से काटने लगा हर बाईट पर दीदी अपने बदन को बुरी तरह कसमसा रही थी फिर मैं उनकी कमर को चूमने और काटने लगा और अब तो दीदी जोर से पैर पटकने लगी थी बर्दाश्त के बाहर हो रहा था उनसे ….. पर मेरा दिल अभी कहाँ भरा था …. मैंनेउनके पीछे बैठ कर उनके नंगे चूतड़ों को जीभ निकाल कर चाटना शुरू कर दिया और चाट चाट कर गीला कर दिया और फिर मैंने बड़ा सा मुह खोल कर उनके एक चूतड़ को मुह में भर कर जोर से दांत गड़ा दिए इस बार दीदी के मुह से बॉल घुसी होने के बाद भी चीख निकल गयी और वो तेजी से सर हिलाते हुए गूँ गूँ की आवाज़ कर रही थी …. पर मैं बारी बारी दोनों चूतड़ों को जोर जोर दे काटता रहा और उनके गोरे चूतड़ों पर कई जगह दांतो के निशान बन गए …. फिर मैने खड़े हो कर फिर से केन उनके चूतड़ों पर तीन बार कस कस के मारा और दीदी के मस्ताने चूतड़ों पर 3 लाल लकीरें उभर आई अब दीदी के चूतड़ बेहद मस्त और सेक्सी लगा रहे थे और वो कुछ कहना चाह रही थी पर उनके मुह से गो गो के सिवा कोई आवाज़ नही निकल रही थी फिर मैंने दीदी के ठोंग में उंगलियां फंसाई और उसे नीचे सरका दिया और दीदी के चूतड़ फैलाये उफ्फ दीदी के गांड़ के छेद से बट प्लग का हैंडल नजर आ रहा था जो कि पिंक कलर का था और यूं लग रहा था दीदी की गांड़ पॉय गुलाबी रंग का कोई हीरा जड़ा हो …. मैंने दीदी को फिर से बालों से पकड़ा और घसीटते हुए बेड तक ले जा कर बेड पर धकेल दिया ऑयर उनका माउथ बॉल खोल दिया उसे मुह से निकालते ही वो गहरी गहरी सांस लेते हुए हांफने लगी और उधर मैंने प्लग का हैंडल पकड़ कर उसे एक झटके से दीदी की गांड़ से बाहर खींच लिया दीदी की गांड़ के अंदर का गुलाबी मांस मुझे दिख रहा था और वो बट प्लग मैंने दीदी के खुले हुए मुह में घुसा दिया और कहा इसे चूस हरामजादी दीदी अपनी गांड़ से निकले हुए उस रबर के छोटे से लंड को चूसने लगी और मैं उनकी टांगो के बीच बैठ कर उनकी टांगे पकड़ कर मोड़ कर फैला कर झुका और लंबी सी जीभ निकाल कर दीदी की गांड़ के खुले हुए छेद में अंदर तक घुसा कर चाटने लगा दीदी ने तुरंत ही बट प्लग को मुह से बाहर उगल दिया और बोली आहहह संजू अब बस भी कर मार डालेगा क्या अब चोद मुझे पेल अपना लौड़ा मेरी बुर में और कस कस के चोद डाल अपनी रण्डी को हाय हरामी अब और मत तड़पा मैं मर जाऊंगी …. मैंने एक बार दीदी की गांड़ के छेद को मुह में भर कर जोर से चूसा और सर उठा कर दीदी की आंखों में देखा तो वो फिर से संजू चोद दे ना ….. और मैं उठ कर दीदी के ऊपर लेट सा गया और दीदी के सीने को चूमने लगा निप्पल पर तो कपड़ा था पर बाकी गोल गोल नंगी चुचियों को मैं जीभ से कुत्ते जैसे चाट रहा था और दांतों से जोर जोर से काट रहा था वो किसी मछली जैसी तड़प रही थी हांथ बंधे होने की वजह से बेबस थी …. वो फिर से बोली चोद ना बहनचोद अब …. मैंने कहा किसे चोदू …. वो बोली मुझे …. मैंने कहा तू कौन …. वो बोली मैं तेरी दीदी मेरे प्यारे भाई …. मैंने कहा और कौन है तू … वो फौरन बोली तेरी बीवी तेरी रखैल तेरी पर्सनल रण्डी …. मैंने कहा और बोल ना … वो बोली तेरी पालतू कुतिया …. मादरचोद रण्डी रुचि … अब बस इस रण्डी की बुर की प्यास बुझा दे मेरे चोदू फाड़ दे मेरी बुर को बहोत आग लगी है इसमे ….. मैंने दीदी की वो ब्रा ओपन की और खींच कर फेंक दी अब हम दोनों एकदम नंगे थे और फिर मैंने बारी बारी दीदी के काले काले मोटे निप्पल्स मुह में भर कर जोर से काटने शुरू कर दिए मैं बेरहमी से दीदी के निप्पल्स को दांतों से चबा रहा था और दीदी मस्ती में जोरो से सिसक रही थी ….. आखिर में दीदी थोड़े गुस्से में बोली संजू मादरचोद एक बार चोद दे ना बाद में चाहे जितना नोच लेना मेरे जिस्म को ये तो अब तेरा ही गुलाम है ….. मुझे थोड़ा तरस आया दीदी पर मैंने नीचे सरक कर दीदी की चूत देखी ओह वो तो इतना पानी बहा चुकी थी कि बिस्तर पर एक गीला धब्बा से बन गया था …. मैंने एक बार दीदी की बुर को मुह में ले कर जोर से चूसा और चिकना से लसलसा जूस मेरे मुह में आ गया उसे पी कर मेरी उत्तेजना और बढ़ गयी …. और फिर मैंने दीदी की जलती बुर पर अपना सख्त सुपाड़ा रख कर जोर से रगड़ दिया दीदी ने फौरन नीचे से अपनी कमर उछाली और दो इंच लौड़ा बुर में ले लिया …. मैंने उनकी आंखों में देख कर कहा बहोत चुदासी है साली कुतिया दीदी बोली हाँ मेरे राजा अब बस पूरी ताकत से चोद दे पर मैंने लंड दीदी की बुर दे बाहर निकाल लिया दीदी के चेहरे पर अब खीझ और गुस्से के भाव थे वो गुस्से से बोली तुझे हो क्या गया है …. मैंने कहा कुछ नही बस एक बात कहनी है वो बोली जल्दी बोल ना साले और मुझे तेरी हर बात मंजूर है बस अब लंड घुसा मैंने फिर से लंड दीदी की बुर पर टिकाया और एक ही धक्के में 8 इंच लंड उनकी बुर के आखिरी छोर तक ठोंक दिया दीदी के मुह से एक लंबी सी आहहह निकली और वो बोली बस अब चोद मेरे भाई कस के ठोंक अपनी बहन की चूत चोद चोदनके भोसड़ा बना दे मैंने लंड के धक्के मारते हुए दीदी के होंठ चूसने शुरू कर दिया और फिर बोला दीदी मेरा दिल करता है तुझे दो तीन लंड से एक साथ चुदवा दूँ दीदी अपनी चूत नीचे से लंड पर पटकती हुई बोली तेरा जो दिल करता है कर लेना मैं कभी किसी चीज के लिए तुझे ना नहीं करूंगी बस मुझे तड़पाया मत कर गरम कर के मैंने जोर से धक्के लगाते हुए कहा साली कुतिया तड़पाने के चोद के मज़े तो मैं ही देता हूँ और सच बताना इस तड़प में भी तो मज़ा आता है ना तुझे दीदी बोली हॉं आता तो है पर आज कुछ ज्यादा ही हो गया था मैंने कहा अभी तो ये शुरुवात ही है मेरी जान देखती जाओ आगे आगे होता है क्या और फिर मैंने दीदी को बाहों में कस के भर के उनके बदन को अपने नीचे दबा के लंबे लंबे शॉट मारने शुरू किए और लंड सटासट दीदी की गीली चीकनी बुर चोदने लगा उधर मैं दीदी के निप्पल्स बारी बारी से चबाते हुए पूरी रफ्तार से चोद रहा था और दीदी अपनी कमर मेरे लंड पर पटक पटक कर चुद रही थी मैंने कहा सोच कुतिया एक लंड इतने मज़े दे रहा है अगर तेरी चूत गांड़ और मुह में एक साथ लंड घुसे हों तो कितना मज़ा आएगा तुझे दीदी एकदम से गनगना गयी और बोली हाँ राजा सोच कर ही मज़ा आ रहा है जल्दी से चुदवा दे अपनी रखैल को तीन लंड से एक साथ aaaahhh aaaahhh मैं गयी संजू और दीदी का बदन थरथराने लगा और इसी के दीदी की बुर से पानी की फुहारें निकलने लगी और वो झड़ने लगी मैं हलके हल्के धक्के लगाते हुए उन्हें झड़वाने लगा और आखिर में वो एकदम निचुड़ी हुई निढाल सी गहरी सांसें लेती हुई बेहोश सी हो गयी …. मैंने उनकी बुर से लंड निकाला और एक बार उनकी बुर को अच्छे से चाटा और फिर रूम में आ कर एक सिगरेट सुलगा ली अभी मैं नही झड़ा था …….

दोस्तों अगर आप ये कहानी आगे भी पढ़ना चाहते हैं तो plz मुझे मेल करें और अपने सुझाव दें

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