कामिनी की कामुक गाथा (भाग 52)

अब तक आप लोगों ने पढ़ा कि किस तरह रेखा हम मां बेटों के जाल में फंस कर मेरे बिस्तर तक पहुंच गयी। पहले मैंने उसकी इतने सालों की दबी वासना की आग को भड़काने का काम किया और मैं उसके साथ समलैंगिक संबंध स्थापित करने में सफल हो गयी। इसी दौरान उसके अंदर पर पुरुष से समागम की इच्छा को भी जगाया। यह इच्छा इस कदर भड़की कि वह किसी भी पुरुष की अंशायिनी बनने के लिए तैयार हो गयी। तभी मेरे बेटे क्षितिज का आगमन हुआ। क्षितिज ने अपनी कामक्रीड़ा का ऐसा जादू चलाया कि वह चुदास के मार बेहाल हो उठी, इस बात से बेपरवाह कि क्षितिज एक भीमकाय आठ इंच लिंगधारी नादान चुदक्कड़ है। काफी देर के इस कामकेली के दौरान उत्तेजना के मारे खुद क्षितिज की हालत भी काफी खराब हो चुकी थी। अब आगे –

काफी देर से किस तरह क्षितिज ने खुद को संभाला हुआ था पता नहीं। कोई और होता तो अबतक रेखा के चूत की तिक्का बोटी करना शुरू कर चुका होता, लेकिन वाह भई वाह, कमाल का नियंत्रण था खुद पर। लेकिन कब तक। क्षितिज की कामुक हरकतों से पुनः बेकल होने लगी रेखा।

“ओह उफ्फ्फ्फ, आह, फिर से, ओह फिर से जगा दिया रे जादूगर बालक मेरी चुदास। ओह राजा बेटा, अब चोद ही डाल अपनी आंटी की चुदासी चूत। उफ्फ्फ्फ मां यह कैसी आग भड़क उठी तेरी शैतानी से। देख मेरी चूत का क्या हाल कर दिया तूने मां के लौड़े। खोज रही है लंड, आह अब खिला भी दे अपना लौड़ा इसे, ओह भगवाआआआआआन।” कामुकता की अग्नि में तड़पती एक नारी की कातर पुकार थी।

“ओके आंटी, चलिए अब तैयार हो जाईए।”

“तैयार ही हूं मां के लौड़े।”

इतना सुनना था कि क्षितिज ने रेखा के दोनों पैरों को उठा कर अपने कंधों पर चढ़ा लिया और अपने भीमकाय लिंग के सुपाड़े को उसकी नयी नकोर चमचमाती चूत के प्रवेश द्वार पर टिका कर मानो युद्ध की घोषणा कर बैठा, “लीजिए, संभालिए अपनी चूत में मेरा लौड़ा।” सिर्फ घोषणा ही नहीं किया, इससे पहले कि रेखा संभल पाती, भच्च से ठोंक भी दिया। “हुम्म्म्म्म्म्म्मा्आ्आ्आ्आ्आह्ह्ह्ह्”। इतने सालों से अनचुदी चूत, जो किसी नवयौवना की चूत सरीखी छोटी और संकीर्ण हो चुकी थी, ककड़ी की तरह फट गयी। क्षितिज का लिंग, रेखा की चूत के संकीर्ण मुख को फाड़ता हुआ एक तिहाई अंदर दाखिल हो चुका था।

“आ्आ्आ्आ्आ्आह्ह्ह्ह अम्म्म्म्आ्आ्आ्आ्आ, मममममर्र्र्र्र्र्र गय्य्य्यी्ई्ई्ई्ई्ई रे ओओओओओओफ्फ्फ्फ, आह।” एक दर्दनाक चीख से पूरा कमरा दहल उठा। एक पल क्षितिज रुका लेकिन अगले ही पल एक और हौलनाक हमला कर बैठा बिना रेखा की चीख की परवाह किए।

“चीखिए आंटी, चिल्लाईए आंटी, मगर अब इतनी देर से तरसते मेरे लौड़े को मिल गयी आह्ह्, इतनी मस्त टाईट चूत मिल गयी ओह्ह्ह्ह्ह्ह, देखिए आधा घुस्स्स्स्आ्आ्आ्आ्ह्ह गया।” भूखे दरिंदे की तरह बेपरवाह आवाज थी उसकी और रेखा बेचारी छटपटा रही थी, कसमसा रही थी उसके जालिम बंधन में किसी परकटी पंछी की तरह।

“हाय्य्य्य्य हाय्य्य्य्य, फट्ट्ट्ट्ट गय्य्य्य्ई्ई्ई्ई, ओह्ह्ह्ह्ह्ह जालिम, मार्र डाला रेएएएएएए।” चीखती रही चिल्लाती रही मगर क्षितिज को तो मिल गया था एक नयी कसी हुई चूत का स्वाद। उसकी नग्न देह को बेरहमी से दबोचे घप्प से एक और भीषण प्रहार कर बैठा वह। “आह ओह्ह्ह्ह्ह्ह बस कर बस कर, निकाल अपना लंड आ्आ्आ्आ्आ्आह्ह्ह्ह, मर जाऊंगी बाबा।” वह दर्द से बेहाल तड़प रही थी, किसी हलाल होती हुई बकरी की तरह। तीन चौथाई लंड उसकी चूत को चीरता हुआ दाखिल हो चुका था।

“चीख, और जोर से चीख, चिल्ला, जोर जोर से चिल्ला मेरी चूतमरानी आंटी, ताकि इस घर में सबको पता चल जाए कि एक आंटी चुद रही है अपने बेटे की उम्र के लड़के से। यही चाहती हो आप?” गुर्राहट निकली उसके मुख से। खून का स्वाद जो मिल गया था शेर को।

“ननननननह्ह्ह्हहींईंईंईंई, तू बस कर अब, छोड़ आंआंआंआंआंआ,” रोने लगी वह, आंसू आ गये उसकी आंखों में। हां आवाज अब मद्धिम थी।

“लीजिए, अब बस हो गया, छोड़ रहा हूं। हुम्म्म्म्म्म्म्मा्आ्आ्आ्आ्आह्ह्ह्ह्,” एक अंतिम प्रहार, और हो गया रेखा की चूत का काम तमाम। जड़ तक ठोक दिया क्षितिज ने।

“हा्हा्हा्आ्आ्आ्आ्य्य्य्य्य्य्य आ्आ्आ्आ्आ्आह्ह्ह्ह, साली कुतिया कामिनी कहां मर गयी तू्ऊ्ऊ्ऊ्ऊ्ऊ आह।” मैं जानती थी कि मेरा बेटा किला फतह कर चुका है।

“आ गयी मैं, बोल।” मैं बाथरूम से उसी तरह नंग धड़ंग बाहर आ गई, अपने कपड़े समेटे।

“ओह मॉम यू आर ग्रेट। आंटी बड़ी मस्त है।” मुझे देख कर क्षितिज खुशी के मारे बोला।

“साले मां बेटे एक ही थैली के चट्टे बट्टे हैं। आह ओह्ह्ह्ह्ह्ह, मुझे फंसा कर अपने बेटे से मरवा रही है आआआआ््ह््ह््हह्हह।” अब उसे सब समझ आ गया था। लेकिन चिड़िया तो खेत चुग गयी थी।

“समझ गयी ना। चलो अच्छा हुआ, अब चुद जा मेरे बेटे से। बोल रही थी न कोई भी मर्द, कैसा भी मर्द। मिल गया मर्द, तो रो काहे रही है साली बुरचोदी।” मैं कोई रहम दिखाने थोड़ी आई थी। मैं तो तमाशा देखना चाहती थी। मुझे मालूम था कि कुछ ही देर में रेखा दर्द भूल कर खूब मजे से चुदवाने लगेगी।

“आह्ह्ह् ओह्ह्ह्ह्ह्ह, मैंने मर्द बोला था हरामजादी, गधा नहीं। ओह मेरी मां्म्म्आ्आ्आ्आ्आ।” तड़प कर चीखी वह मुझ पर।

“जो समझना है समझ तू। क्षितिज बेटा, अब यह तेरे हवाले।” बोलती हुई मैं निकलने लगी।

“आप जा कहां रही हो मॉम? देख तो लो अपने बेटे की करामात।” तुरंत क्षितिज बोला।

“अब भाग कहां रही है कुतिया मुझे इस हाल में छोड़ कर? मर रही हूं रे हरामजादी, बाआआआआआआआप रेएएएएएए बाआआआआआप, अपने पागल कुत्ते को मुझे भंभोड़ने के लिए भिड़ा कर आह आह्ह् भागी कहां जा रही है साली बुरचोदी। रोक अपने लौंडे को, ओह मां्म्म्आ्आ्आ्आ्आ।” रेखा कलपती हुई बोली।

“ठीक है बाबा ठीक है, नहीं जाती, मगर रोक भी तो नहीं सकती ना, तेरी ऐसी खूबसूरत नंगी देह को देख कर कोई भी पगला जाएगा, फिर यह तो ठहरा नया नया चुदक्कड़” बैठ गयी वैसी ही नंग धड़ंग बेशरम हो कर सामने कुर्सी पर, “अब रोना धोना बंद कर, हो गया तेरी इतने सालों से अनचुदी चूत का रास्ता साफ। कुछ देर सब्र कर पगली, फिर देख चुदाई का मजा।” मैं रेखा की हालत देख कर तनिक द्रवित हो उठी।

“लेकिन मॉम, रेखा आंंटी तो ऐसे रो चिल्ला रही है कि मैं इनको हलाल कर रहा हूं।”

” क्षितिज बेटे, न जाने कितने सालों से चुदी नहीं है बेचारी, थोड़ा आराम से चोद। कुछ ही देर में सब ठीक हो जाएगा। एक तो इसकी इतनी छोटी, नयी लौंडिया जैसी चूत, और ऊपर से तेरा यह गधे जैसा आठ इंच का लंबा मोटा लंड, शायद पहली बार ऐसे लंड से पाला पड़ा है, चिंता न कर, कुछ ही देर में सब ठीक हो जाएगा। फिर देखना यह खुद बोलने लगेगी, चोद राजा चोद।” मैं उसे आश्वस्त करती हुई बोली। “तू भी तो ठहरा एक नंबर का अनाड़ी, पहली बार में ही कोई ऐसा चोदता है क्या ऐसी किसी कमसिन चूत को? थोड़ा प्यार से बेटा, आराम से।” यह एक प्रकार से क्षितिज का प्रशिक्षण भी था।

“ठी है मॉम ठीक है” कुछ देर क्षितिज उसी स्थिति में स्थिर रहा, उसका पूरा आठ इंच का लंड रेखा की चूत के अंदर पैबस्त था। रेखा भी अबतक समझ गयी थी कि मेरे सामने भी उसका रोना कलपना कुछ काम नहीं आ रहा है, उल्टे मेरी रुचि अपने बेटे को चोदने का प्रशिक्षण देने में है। वह यह भी समझ गयी थी कि यह सब हम मां बेटे का पूर्वनियोजित षड़यंत्र है, जिसमें वह फंस गयी है। उसे इस बात का भी अवश्य ताज्जुब हो रहा था कि मैं कितनी बेशरम मां हूं जो खुद नंगे बदन रहते हुए पूरी बेशरमी के साथ न सिर्फ बेटे की चुदाई देख रही थी बल्कि उसे निर्देश भी दे रही थी। क्षितिज हौले हौले लंड बाहर निकालने लगा, आराम से, बिल्कुल आराम से।

“आ्आ्आ्आ्आ्आह्ह्ह्ह” क्षितिज और रेखा, दोनों के मुख से सिसकारी निकली, जहां क्षितिज के मुख से आनंद की वहीं रेखा के मुख से राहत की। “चूस रही है मॉम चूस रही है, रेखा आंटी की चूत चूस रही है मेरा लौड़ा, आह्ह्ह्।”

“चूसेगी बेटा चूसेगी, टाईट चूत जो है। अब कैसा लग रहा है रेखा बोल?” मैं बोली।

“आआआआआह्ह्ह्ह्ह, अच्च्च्च्छ्छ्छा्आ्आ्आ, बहू्ऊ्ऊ्ऊ्ऊत अच्च्च्च्छ्छ्छा्आ्आ्आ।” एक दीर्घ निश्वास के साथ बोल उठी। क्षितिज अपने लंड के सुपाड़े को चूत के अंदर ही रहने दिया और कुछ पल स्थिर रहा। पुनः दबाव देने लगा अपने लंड का, हौले हौले, प्यार से, आराम से। “आ्आ्आ्आ्आ्आह्ह्ह्ह, ई्ई्ई्ई्ईस्स्स्स्स्स” इस बार फिर रेखा सिसकी, लेकिन यह सिर्फ पीड़ा की नहीं थी, आनंद मिश्रित पीड़ा की सिसकी थी यह।

“आआआआआह्ह्ह्ह्ह, आंटी्ई्ई्ई्ई्ई्ई, उफ्फ्फ्फ आंटी्ई्ई्ई्ई्ई्ई, अब मत रोना, आह, अब मत चीखना।” कहकर चूमने लगा रेखा को, उसके रसीले होंठों को, उसके गालों को। रेखा अब दर्द पीड़ा सब भूलती जा रही थी। धीरे धीरे पूरा लंड डाल दिया क्षितिज नें।

“आ्आ्आ्आ्आ्आह्ह्ह्ह,” यह आह थी रेखा की, रेखा की आनंदय स्वीकृति की। क्षितिज ने फिर निकाला लंड और “फच्च्चा्आ्आ्आक” फिर भोंक दिया, “हू्ऊ्ऊ्ऊम्म्म्म।” “आ्आ्आ्आ्आ्आह्ह्ह्ह” आनंद की सिसकारी रेखा के मुख से। ठीक हो रहा था, ठीक हो गया था, हमारी योजना कामयाबी के अंतिम चरण में थी। अब क्षितिज सहज हो कर पहले धीरे धीरे, फिर ठोकने की रफ्तार बढ़ाने लगा। रेखा भी अब मस्ती में आने लगी, सारी पीड़ा छूमंतर हो गयी थी उसकी, चूतड़ उछालने लगी। “आ्आ्आ्आ्आ्आह्ह्ह्ह क्षितू्ऊ्ऊ्ऊ्ऊ्ऊ बेटा्आ्आ्आ, ओह्ह्ह्ह्ह्ह चोदू्ऊ्ऊ्ऊ्ऊ, ओह्ह्ह्ह्ह्ह रज्ज्ज्ज्ज्आ्आ्आ्आ्ह्ह्ह्ह।” मस्त हो गयी चुदने में और मेरे बेटे की तो मानो निकल पड़ी, खुश, मगन, चुदाई की गाड़ी चल पड़ी, सरपट दौड़ने लगी, निर्बाध, बेलगाम। शुरू हो गया वासना का वीभत्स तांडव।

वही रेखा जो कुछ समय पहले रो रही थी चिल्ला रही थी, अब क्षितिज के गठे हुए नंगे तन के नीचे पिसती हुई, छिपकली की तरह चिपकी हुई, अपनी चूतड़ उछाल उछाल कर गपागप, सटासट, चूत में पूरे आठ इंच का गधे जैसे लंड को खाती जा रही थी, चुदती जा रही थी। “ओह राजा आह राजा, उफ्फ्फ्फ बेटा, चोद हरामी चोद, अपने लौड़े की रानी बना ले मुझे आह चोदू ओह मेरी चूत के स्वामी आह।” बड़बड़ाती जा रही थी।

“ओह आंटी्ई्ई्ई्ई्ई्ई, उफ्फ्फ्फ आंटी्ई्ई्ई्ई्ई्ई, मस्त आ्आ्आ्आ्आ्आह्ह्ह्ह क्या मस्त टाईट चूत है आपकी, ओह मेरी जा्आ्आ्आ्आन, मजा आ रहा है ओह आंंटी कहां थी आज तक आह। ओह मॉम, ऐसी मस्त चुदक्कड़ आंटी के लिए थैंक्स, आह ओह मॉम, यू आर ग्रेट, ओह मेरी बुरचोदी आंटी्ई्ई्ई्ई्ई्ई, चूतमरानी आंटी्ई्ई्ई्ई्ई्ई,” क्षितिज भी मस्ती में भर कर चोदे जा रहा था। निचोड़े जा रहा था।

मैं खुश हो गयी। मेरी योजना सफल हो गयी। मैं उस घमासान चुदाई की दर्शक, मेरी क्या हालत हो रही थी बता नहीं सकती। मेरा एक हाथ मेरी चूचियां मसल रहा था, दूसरा हाथ मेरी चूत। मैं अपने पैर फैला कर पूरी बेशरमी के साथ अपनी योनि पर उंगली फिरा रही थी, योनि रगड़ रही थी, भगांकुर को मसल रही थी, अपनी उंगली योनि के अंदर डाल डाल कर हस्तमैथुन के आनंद में डूबी जा रही थी। भीषण चुदास के मारे मरी जा रही थी। उधर क्षितिज अब बिल्कुल पागल हो गया था। रेखा भी पगला गयी थी। एक दूसरे से गुत्थमगुत्थी हो कर जंगलियों की तरह एक दूसरे को नोच खसोट रहे थे। चूम रहे थे काट रहे थे। पलंग चरमरा रहा था, धमाधम कुटाई चल रही थी। वासना के सैलाब में बहते आपस में कामोत्तेजक शब्दों और बेहद गंदी गंदी गालियों की मानो प्रतियोगिता चल रही हो। करीब आधे घंटे की घमासान चुदाई चलती रही और अंततः एक दूसरे को भींचे स्खलन के स्वर्गीय सुख में खो गये।

“आ्आ्आ्आ्आ्आह्ह्ह्ह, ओ्ओ्ओ्ओह्ह्ह्ह््ह्ह, इस्स्स्स्स्स आं्आं्आंह्ह्ह्ह गय्य्य्य्ई्ई्ई्ई रेएएएएएए गय्य्य्य्ई्ई्ई्ई मैं्मैं्ऐं्ऐं्ऐं्ऐं” रेखा क्षितिज की बांहों में पिसती हुई लंबी सुखमय चीख के साथ थरथरा उठी और झड़ कर निढाल हो गयी।

उसके निढाल होते हुए नग्न शरीर को क्षितिज ने भंभोड़ना जारी रखा, “ओह आह आह आह, ओह्ह्ह्ह् ओह्ह्ह्ह्ह्ह, ले, और ले, मां की लौड़ी ले बुरचोदी, आह मेरी चूतमरानी आंटी्ई्ई्ई्ई्ई्ई”।” एक मिनट बाद ही क्षितिज भी छर्र छर्र झड़ने लगा। पूरी शक्ति से रेखा के तन को दबोच कर खल्लास हो गया और निढाल एक तरफ लुढ़क गया।

आगे की घटना अगली कड़ी में।

तबतक के लिए इस कामुक लेखिका को आज्ञा दीजिए।

आपलोगों की

वासना की पुजारन

रजनी

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Rajni4u

मैं एक 51 साल की विधवा शिक्षिका हूँ। मैं कामोत्तेजक कहानियां पढ़ना, दोस्ती करना और दोस्तों से किसी भी प्रकार की चैटिंग करना पसंद करती हूं। मेरी रुचि संगीत में भी है। फिलहाल मैं अपनी कामुक भावनाओं को कहानियों के माध्यम से लोगों के सम्मुख प्रस्तुत करने का प्रयास कर रही हूं।